एन ए आई ब्यूरो, शिमला
100 करोड़ रुपये का फल प्रसंस्करण संयंत्र पराला 15 अगस्त से उत्पाद तैयार करना शुरू कर देगा। स्विट्जरलैंड के इंजीनियरों की टीम इसे चालू करने में जुटी है और 10 अगस्त यह काम पूरा कर देगी।
इसके शुरू होने से सरकार को सेब को परवाणू पहुंचाने के खर्च में बचत होगी। संयंत्र की क्षमता 18 हजार टन सेब या अन्य फलों को क्रश करने की क्षमता है। परवाणू फल प्रसंस्करण संयंत्र में लगी मशीनें बहुत पुरानी हैं, जबकि परला में अत्याधुनिक मशीनों को स्थापित किया गया है
ऐसे में प्रतिदिन 200 टन सेब को क्रश कर उसका पल्प तैयार किया जा सकेगा। इससे 20 से 25 किलो तक पल्प के तैयार होने को अनुमान है, जबकि परवाणू में 18 से 20 किलो पल्प तैयार होता है। इससे हिमाचल प्रदेश के बागवानों के साथ-साथ सरकार को लाभ होगा।
हिमाचल प्रदेश बागवानी उत्पाद विपणन एवं प्रसंस्करण निगम (एचपीएमसी) सी ग्रेड सेब की बागवानों से खरीद कर रहा है। अभी तक 326 टन सी ग्रेड सेब की खरीद कर ली गई है। शिमला-परवाणू मार्ग बंद होने के कारण 100 किलोमीटर का अतिरिक्त भाड़ा चुका एचपीएमसी को सी ग्रेड सेब परवाणू पहुंचाना पड़ रहा है।
