एन ए आई, ब्यूरो।
शिमला, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) में एनईपी को इस सत्र से लागू करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। विश्वविद्यालय स्तर पर स्नातक पाठ्यक्रमों के लिए नए ढांचे पर काम चल रहा है और संबद्ध कॉलेजों में भी आवश्यक तैयारियां शुरू हो गई हैं। प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने के बाद पढ़ाई की संरचना, विषय चयन और मूल्यांकन प्रणाली में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे।
नई व्यवस्था के तहत स्नातक शिक्षा को अधिक लचीला और बहुविषयक बनाने पर जोर दिया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने ऐसे पाठ्यक्रम ढांचे की तैयारी शुरू की है जिसमें छात्र मेजर और माइनर विषय चुन सकेंगे। इससे छात्र अपनी मुख्य पढ़ाई के साथ अन्य विषयों का अध्ययन भी कर सकेंगे। नई नीति के तहत तीन वर्षीय और चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम शुरू करने की योजना है। तीन वर्ष का पाठ्यक्रम सामान्य स्नातक डिग्री के रूप में होगा जबकि चार वर्षीय कार्यक्रम में छात्र ऑनर्स या ऑनर्स विद रिसर्च का विकल्प चुन सकेंगे। चौथे वर्ष में शोध आधारित अध्ययन और प्रोजेक्ट कार्य को विशेष महत्व दिया जाएगा जिससे उच्च शिक्षा और शोध के लिए छात्रों की बेहतर तैयारी हो सके।
नीति के महत्वपूर्ण प्रावधानों में मल्टीपल एंट्री और एग्जिट व्यवस्था भी शामिल है। इसके तहत यदि कोई छात्र किसी कारण से पढ़ाई बीच में छोड़ता है तो उसे उस अवधि के अनुसार प्रमाणपत्र मिलेगा। एक वर्ष पूरा करने पर सर्टिफिकेट, दो वर्ष के बाद डिप्लोमा और तीन वर्ष पूरा करने पर स्नातक डिग्री प्रदान की जाएगी। चार वर्ष पूरा करने वाले छात्रों को ऑनर्स या रिसर्च आधारित डिग्री मिलेगी।
सरकार ने प्रदेश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को नई शिक्षा नीति के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसी क्रम में एचपीयू में क्रेडिट आधारित प्रणाली, कौशल आधारित विषयों और ऑनलाइन पाठ्यक्रमों को भी शामिल करने की योजना पर काम चल रहा है। इससे छात्रों को विभिन्न विषयों और संस्थानों से क्रेडिट अर्जित करने की सुविधा मिलेगी। परीक्षा प्रणाली में भी बदलाव प्रस्तावित हैं। विवि आंतरिक मूल्यांकन को अधिक प्रभावी बनाने और परीक्षा परिणाम तय समय सीमा में घोषित करने की दिशा में कदम उठा रहा है। इसके साथ ही डिजिटल मूल्यांकन और समयबद्ध परिणाम प्रणाली पर भी विचार चल रहा है।
नई शिक्षा नीति को पूरी तरह लागू करने में कुछ चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। कई कॉलेजों में चार वर्षीय कार्यक्रम और शोध आधारित पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए पर्याप्त फैकल्टी और आधारभूत ढांचे की जरूरत पड़ेगी। कुपलपति महावीर सिंह ने बताया कि फिलहाल एनईपी लागू करने पर चर्चा चल रही है।
