एन ए आई, ब्यूरो।
शिमला, हिमाचल प्रदेश की औद्योगिक विकास यात्रा में एमएसएमई फेस्ट-2026 एक आर्थिक मील का पत्थर बनकर सामने आया। शिमला के ऐतिहासिक पीटरहॉफ परिसर में आयोजित इन्वेस्टर मीट ने राज्य की निवेश क्षमता, नीति स्थिरता और भविष्य उन्मुख औद्योगिक दृष्टि को राष्ट्रीय मंच पर मजबूती से स्थापित किया। इस उच्चस्तरीय सत्र में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की उपस्थिति में कुल 37 समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए, जिनके माध्यम से लगभग 12,000 करोड़ के प्रस्तावित निवेश का मार्ग प्रशस्त हुआ। इन्वेस्टर मीट के दौरान जिन क्षेत्रों में निवेश प्रस्ताव सामने आए, वे राज्य की दीर्घकालिक औद्योगिक नीति और सतत विकास मॉडल के अनुरूप हैं।
इनमें फूड प्रोसेसिंग, मूल्य संवर्धन, पोस्ट-हार्वेस्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर और एग्री-बेस्ड एमएसएमई को मजबूती, फार्मास्यूटिकल्स, अनुसंधान आधारित उत्पादन, बल्क ड्रग्स और निर्यात क्षमता में विस्तार, डिफेन्स मैन्युफैक्चरिंग, आत्मनिर्भर भारत के अनुरूप रक्षा उत्पादन में भागीदारी, ग्रीन मोबिलिटी, इलेक्ट्रिक वाहन, कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग और चार्जिंग इकोसिस्टम सोलर एवं नवीकरणीय ऊर्जा, स्वच्छ ऊर्जा, कार्बन न्यूट्रलिटी और ग्रीन इंडस्ट्रियलाइजेशन ये क्षेत्र न केवल उच्च निवेश गुणक रखते हैं, बल्कि तकनीकी दक्षता, हरित अर्थव्यवस्था और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा देते हैं। उद्योग विभाग की मेहनत काम आई।
निवेश से बढ़ेगा रोजगार, पूजी का होगा निर्माण
यह निवेश राज्य की औद्योगिक जीडीपी, पूंजी निर्माण, रोजग़ार सृजन और क्षेत्रीय संतुलित विकास के लिए एक निर्णायक आधार सिद्ध होगा।
इन्वेस्टर मीट का लाभ
इन्वेस्टर मीट की अतिरिक्त मुख्य सचिव (उद्योग) आरडी नज़ीम ने कहा कि ये एमओयू केवल निवेश प्रस्ताव नहीं, बल्कि निवेशक विश्वास, नीतिगत स्पष्टता और प्रशासनिक सुगमता का प्रतिबिंब हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि राज्य सरकार निवेशकों को सिंगल विंडो क्लीयरेंस और नीति स्थिरता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे निवेश प्रस्ताव वास्तविक उत्पादन इकाइयों में शीघ्र परिवर्तित हो सकें।
आय पर फोकस
सत्र में निदेशक उद्योग डा. यूनुस तथा अतिरिक्त निदेशक तिलक राज शर्मा की सक्रिय भूमिका रही। अधिकारियों ने निवेशकों को राज्य की औद्योगिक पारिस्थितिकी, भूमि उपलब्धता, प्रोत्साहन योजनाओं और एमएसएमई-अनुकूल ढांचे की विस्तृत जानकारी दी। यह स्पष्ट किया गया कि सरकार का उद्देश्य केवल एमओयू साइन करना नहीं, बल्कि निवेश को धरातल पर उतारना, उत्पादन क्षमता बढ़ाना और राज्य की आय संरचना को सुदृढ़ करना है।
