एन ए आई, ब्यूरो।
बिलासपुर, स्वारघाट थाना के तहत स्वाहण पंचायत के मैहला गांव में एक युवक का शव मिला है। युवक की मौत चिट्टे (हेरोइन) की ओवरडोज से होने की आशंका है। बाजू पर सिरिंज लगाने का ताजा निशान पाया गया है। परिजनों के मुताबिक युवक चिट्टे का आदी था। उसे कुछ समय पहले नशा मुक्ति केंद्र में भी रखा गया था। पुलिस ने क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर में पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद मौत के असली कारणों का पता चल पाएगा।
जानकारी के अनुसार मैहला गांव का लखविंदर सिंह (24) वीरवार शाम को स्वाहण संपर्क मार्ग के किनारे अचेत अवस्था में लोगों को दिखा। सूचना पर उसके परिजन मौके पर पहुंचे। पुलिस की टीम ने मौके का निरीक्षण और फॉरेंसिक विशेषज्ञ को मौके पर बुलाया गया। निरीक्षण के दौरान शरीर में किसी भी प्रकार की चोट या संदिग्ध निशान नहीं पाए गए, लेकिन बाजू पर सिरिंज का ताजा निशान पाया गया, जिससे खून की ताजा बूंद भी निकली थी।
मौके पर मौजूद लोगों से भी पूछताछ की गई। किसी ने भी लखविंदर सिंह की मृत्यु के बारे कोई शक जाहिर नहीं किया है। लखविंदर के भाई और मां ने बताया कि लखविंदर चिट्टा का आदी था। कुछ अरसा पहले उसे नशा मुक्ति केंद्र में भी भेजा गया था। उडीएसपी मुख्यालय मदन धीमान ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारण का पता चलेगा। मामले की जांच जारी है।
रोहडू में विशेष सत्र न्यायाधीश अनिल शर्मा की अदालत ने पिता-पुत्र को चिट्टे के कारोबार में दोषी करार किया है। न्यायालय ने दोनों को सात साल के कठोर कारावास के साथ पचास हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माने का भुगतान न करने पर छह महीने अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।
सरस्वती नगर पंचायत के हीरा सिंह, उसके पुत्र राकेश कुमार के खिलाफ पुलिस ने जनवरी 2022 में पुलिस थाना जुब्बल में मामला दर्ज किया था। विशेष दल शिमला के उप निरीक्षक अंबी लाल, मुख्य आरक्षी ललित कुमार, अमित कुमार, सुनील कुमार, भुवनेश कुमार, आरक्षी धीरज कुमार ने गुप्त सूचना के आधार पर हीरा सिंह के घर की तलाशी की। पुलिस को सूचना मिली थी कि पिता और पुत्र लंबे समय से चिट्टा बेच रहे हैं।
इस दौरान स्वतंत्र गवाहों के समक्ष तलाशी के दौरान रसोई घर से 50.20 ग्राम चिट्टा और 26,990 रुपये की नकदी बरामद हुई। जुब्बल पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने विशेष सत्र न्यायालय रोहड़ू में चालान पेश किया। न्यायालय में अभियोजन के दौरान 13 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के पश्चात आरोप साबित होने पर अदालत ने पिता और पुत्र को दोषी ठहराया। दोनों को सात-सात साल का कठोर कारावास और पचास हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई।
