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एन ए आई, ब्यूरो।

मंडी, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा ने कहा है कि मुस्लिम कुरान और क्रिश्चियन बाइबल जानता है, लेकिन हिंदू समाज भागवत गीता से अनभिज्ञ है। सनातनी भागवत कथा के एक श्लोक के आगे कुछ नहीं कह पाते हैं। यह दुख की बात है। भागवत गीता को अलग कर कहते हैं कि हम सनातनी हैं। भागवत गीता नहीं जानने वाले कैसे सनातनी हो सकते हैं।

वह बुधवार को एसवीएम मंडी में गीता जयंती समारोह में संबोधित कर रहे थे। प्रो. बेहरा ने कहा कि हिंदू समाज भागवत गीता को ही पहचान नहीं पा रहा है कि आखिर यह है क्या? जबकि यही हिंदू समाज की पहचान है। यदि हमारे बच्चे भागवत गीता पकड़ लें तो माता-पिता कहते हैं कि साधु बनने को किसने बोला। उन्होंने साफ किया कि सनातनी वह है जो भागवत गीता को जानता हो। हिंदू समाज के भागवत गीता की अनदेखी पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि भागवत गीता को लेकर गलतफहती है। इसमें विज्ञान तत्व से लेकर ऐसी चीजें हैं जिन्हें विज्ञानी तक नहीं जानते हैं। इन्हें जानने का सामर्थ्य हम में है।

भागवत गीता के कई श्लोक संस्कृत में बोलते हुए उन्होंने गीता का भाव समझाया। चिंता जताई कि सनातनी यह नहीं समझ पाते हैं कि आखिर सनातन क्या है? उन्होंने कहा कि भागवत गीता सनातन का ज्ञान है। एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को ज्ञान प्राप्त हो रहा है। लेकिन अब यह ज्ञान समाप्त हो चुका है। पीढ़ी दर पीढ़ी बांटे जा रहा ज्ञान ही सनातन है। कर्म करने का तरीका भागवत गीता में है। जानवर भी कर्म करता है। कृष्ण की वाणी को जीवन में उतारकर कर्म करें। कर्म कर फल की आशा रखने पर धोखा करोगे। उन्होंने हर दिन गीता पाठ करने का आह्वान भी किया।

कार्यक्रम के मुख्यातिथि प्रो. बेहरा धोती पहनकर समारोह में पहुंचे। उनके संबोधन से पहले महाभारत के अंश दर्शाए गए, जिन्हें प्रो. बेहरा ने अपने कैमरे में कैद किया और तालियों से विद्यार्थियों का प्रोत्साहन किया। अपने संबोधन के दौरान भी उन्होंने विद्यार्थियों के श्लोक का जिक्र किए और इनकी विस्तार से जानकारी दी।

प्रो. बेहरा ने कार्यक्रम के दौरान स्कूल प्रबंधन के प्रयासों का सराहा। उन्होंने कहा कि स्कूल में भागवत गीता की शिक्षा दें। इसके लिए वह आईआईटी से गीता के जानकार भेज सकते हैं। साप्ताहिक तौर पर यह किया जाना चाहिए।

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