एन ए आई, ब्यूरो।

ऊना, उत्तरी भारत के सुप्रसिद्ध धार्मिक स्थल डेरा बाबा बड़भाग सिंह में दस दिवसीय प्रसिद्ध होला मोहल्ला मेले में आस्था का संगम देखने को मिला। विश्वविख्यात इस मेले में देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी हजारों की तादाद में श्रद्धालु नतमस्तक हुए। मेले के आठंवे दिन यानि की होली को निशान साहिब चढ़ाने की रस्म अदा की गई और रंगो गुलाल से होली खेली गयी, जिसमें श्रद्धालुओं ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया।

श्रद्धालुओं की आमद को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए विशेष प्रबंध किए गए है। आज इस मेले का मुख्य दिन होने के चलते हजारों की तादाद में श्रद्धालु बैरी साहिब और मंजी साहिब में नतमस्तक हुए वहीँ श्रद्धालुओं ने चरणगंगा में पवित्र स्नान भी किया। मान्यता है कि इस स्थान पर आकर बुरे साये और प्रेत आत्माओं से भी मुक्ति मिलती है।

मेले के आठवें दिन हर साल की तरह झंडा चढाने की रस्म अदा की गयी। वहीँ 20-21 मार्च की अर्धरात्रि को पंजा साहिब का प्रसाद वितरित किया जायेगा। इसके साथ ही 10 मार्च से शुरू हुए मेले का 21 मार्च को समापन हो जायेगा। होला मोहल्ला मेला हर बर्ष फाल्गुन के विक्रमी महीने में पुर्णिमा के दिन आयोजित किया जाता है। दस दिनों तक मनाए जाने वाला यह मेला देश ही नहीं अपितु विदेश में भी खासा प्रसिद्ध है।

पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल तथा देश के अन्यों हिस्सों से लाखों की तादाद में श्रद्धालु इस मेले में शरीक होने के लिए आते है।  मेले में देश विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की तादाद को देखते हुए पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा चाक चौबंद की गई है । मेला क्षेत्र को नौ सैक्टरों में बांटा गया है तथा प्रत्येक सैक्टर में एक-एक सैक्टर मैजिस्ट्रेट तथा एक-एक पुलिस अधिकारी की नियुक्ति की गई है तथा मेले में 1400 के करीब पुलिस और होमगार्ड के जवानों की तैनाती की गई है।

असामाजिक तत्वों पर नजर रखने के लिए मेला क्षेत्र में जगह जगह पर सीसीटीवी कैमरा भी स्थापित किए गए है । श्रद्धालुओं की माने तो यहां पर सच्चे मन से जो भी मुराद मांगी जाए बाबा जी सभी मनोकामनाएं पूरी करते है।

डेरा बाबा बड़भाग सिंह में मंजी साहिब में झंडे की रस्म के दौरान हजारों की तादाद में श्रद्धालु मौजूद रहे। मंजी साहिब के गद्दीनशीन संत स्वर्ण सिंह ने इस अवसर पर श्रद्धालुओं को शुभकामनायें दी। संत स्वर्णजीत सिंह ने कहा कि इस स्थान पर सभी धर्मों के लोग नतमस्तक होते है और यह मेला एकता व भाईचारे का प्रतीक है।

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