एन ए आई, ब्यूरो।

हिमाचल पथ परिवहन निगम से रिटायर हुए कर्मचारियों को पेंशन के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। सरकार और एचआरटीसी मैनेजमेंट द्वारा कई बार हर महीने 7 तारीख को पेंशनर्स को पेंशन दिए जाने के आश्वासनों के बावजूद इस पर अमल नहीं किया जा रहा। समय पर पेंशन नहीं मिलने के चलते एक तरफ जहां एचआरटीसी से रिटायर इन बुजुर्गों को घर खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ वृद्धावस्था में दवा के लिए भी इनके पास पैसे नहीं जुट पा रहे।

पेंशनर्स का कहना है कि एक तरफ सरकार हर महीने 7 तारीख को पेंशन देने का समय निर्धारित करती है, वहीं दूसरी तरफ खुद ही अपने वादे से मुकर जाती है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने अब भी अपनी रणनीति में सुधार नहीं किया तो बुजुर्गों को एक बार फिर सड़क पर उतर कर प्रदर्शन करने पर मजबूर होना पड़ेगा।

हिमाचल पथ परिवहन निगम से सेवानिवृत्त हुए कर्मचारी प्रदेश सरकार की लचर पेंशन वितरण प्रणाली के चलते मुसीबतों से जूझ रहे हैं। वीरवार को जिला मुख्यालय के पुराना बस स्टैंड में हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम से सेवानिवृत्त हुए तमाम कर्मचारियों ने बैठक कर समय पर पेंशन नहीं दिए जाने को लेकर आक्रोश जताया।

हिमाचल पथ परिवहन निगम सेवानिवृत्त कर्मचारी कल्याण संगठन के जिलाध्यक्ष किशोरी लाल की अध्यक्षता में हुई बैठक के दौरान सभी पेंशनर्स ने एक सुर में सरकार की लचर कार्यप्रणाली की निंदा की। उन्होंने कहा कि समय पर पेंशन नहीं मिलने के चलते जहां बुजुर्गों को घर का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है वहीं इस अवस्था में गाहे-बगाहे पड़ने वाली दवा की जरूरतें भी पूरी नहीं हो रही। उन्होंने कहा कि लंबे अंतराल तक सरकारी कर्मचारी के तौर पर सेवाएं देने उसके बाद पेंशन भोगियों की सूची में शामिल होने के बावजूद उन्हें आपात परिस्थिति में लोगों के आगे हाथ फैलाने पड़ रहे हैं।

उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने पेंशन वितरण प्रणाली को मजबूत नहीं किया तो एक बार फिर उन्हें सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन करने को मजबूर होना पड़ेगा। जिसकी जिम्मेदारी पड़ती है सरकार की ही होगी।

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