एन ए आई, ब्यूरो।

शिमला, प्रदेश के शक्तिपीठों और अन्य मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए सोने-चांदी के सिक्के बनाए जाएंगे। मंदिरों के सोने-चांदी से बनाए जाने वाले सिक्कों को मंदिर में आने वाले श्रद्धालु भी खरीद कर घर ले जा सकेंगे। प्रदेश सरकार ने जिलों के सभी उपायुक्तों को मंदिरों में रखे सोने-चांदी को सिक्कों में कन्वर्ट करने के लिए केंद्र सरकार के माइन एंड मिनरल्स ट्रेडिंग कॉरपोरेशन के साथ एमओयू साइन करने के लिए कहा है।

प्रदेश सरकार के अधीन आने वाले प्रमुख मंदिर जिनमें चिंतपूर्णी, बज्रेश्वरी, ज्वालामुखी, श्रीनयनादेवी, चिंतपूर्णी, मां श्री चामुंडा देवी सहित अन्य ऐसे मंदिर हैं, जिनमें हर साल श्रद्धालु करोड़ों रुपए के सोने चांदी का चढ़ावा चढ़ाते हैं। प्रदेश के प्रमुख 21 मंदिरों में करोड़ों रुपए के सोने चांदी के भंडार मौजूद हैं, जिन्हें अब बिस्किट और सिक्कों में कन्वर्ट किया जाएगा। शक्तिपीठों और मंदिरों के सोने-चांदी से बिस्किट और सिक्के बनाने की यह पूरी प्रक्रिया सुरक्षा निगरानी में पूरी होगी। एमओयू साइन होने के बाद मंदिरों में रखा सोना-चांदी दिल्ली स्थित एमएमटीसी कार्यालय भेजा जाएगा।

सिक्कों के वजन के हिसाब से इसकी कीमत तय की जाएगी। बताया जा रहा है कि मंदिरों में रखा 50 प्रतिशत सोना-चांदी ही सिक्कों में कन्वर्ट किया जाएगा। इसके अलावा 20 प्रतिशत सोना चांदी मंदिर ट्रस्ट अपने इंटरनल यूज के लिए इस्तेमाल करेंगे। 20 प्रतिशत सोना चांदी रिजर्व में रखा जाएगा। शेष बचा सोना चांदी एसबीआई की गोल्ड बॉन्ड स्कीम के तहत रिजर्व रखा जाएगा। उधर, भाषा एवं संस्कृति विभाग के निदेशक पंकज ललित का कहना है कि प्रदेश के शक्तिपीठों और अन्य मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए सोने-चांदी के सिक्के बनाए जाएंगे। इसके लिए सभी जिलों के उपायुक्तों को माइन एंड मिनरल्स ट्रेडिंग कॉरपोरेशन के साथ एमओयू साइन करने के लिए कहा है। उन्होंने बताया कि मंदिरों के सोने-चांदी से बनाए जाने वाले सिक्कों को मंदिर में आने वाले श्रद्धालु भी खरीद कर घर ले जा सकेंगे।

Share:

editor

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *