एन ए आई, ब्यूरो।

ऊना, जिला ऊना के मुबारिकपुर में चल रही धर्म संसद में विशेष रुप से पधारे यति नरसिंहानंद सरस्वती ने खुद को हिंदू समाज का कुत्ता करार दिया है। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज में सदियों की परंपरा रही है कि घरों में या गली मोहल्लों में कुत्ते पाले जाते थे और वही कुत्ते खतरा आने पर चिल्ला चिल्ला कर अपने मालिक को और भोजन खिलाने वालों को आगाह करते थे।

मैं हिंदू धर्म का वही कुत्ता हूं जो वर्तमान परिदृश्य में हिंदू समाज की तरफ बढ़ रहे बड़े खतरे से सचेत करने के लिए चिल्ला चिल्ला कर लोगों को आगाह करता हूं। लेकिन मेरे इसी चिल्लाने को सदैव विवादित करार देकर हिंदू समाज के उत्थान के लिए उठने वाली आवाज को दबाने का प्रयास किया जाता है।

उन्होंने कहा कि पुलिस द्वारा जारी किया गया नोटिस केवल मात्र उच्चतम न्यायालय के आदेशों पर एक संज्ञान है। दूसरी तरफ धर्म संसद के आयोजक यति सत्देवानंद सरस्वती ने कहा कि पुलिस द्वारा जारी किए गए नोटिस का जवाब दिया जा चुका है।

जिला ऊना के मुबारिकपुर में आयोजित की जा रही धर्म संसद को लेकर पुलिस द्वारा थाना अंब के माध्यम से आयोजकों को नोटिस जारी किया गया है।  गौरतलब है कि रविवार से मुबारिकपुर में अखिल भारतीय संत परिषद की तीन दिवसीय धर्म संसद शुरू हुई है।

वहीँ इस इस धर्म संसद में अक्सर विवादित बयानों को लेकर चर्चा में रहने वाले यति नरसिंहानंद बतौर मुख्य वक्ता हिस्सा ले रहे है। धर्म संसद के पहले दिन के सभी सत्र संपन्न होने के बाद पुलिस ने धर्म संसद के आयोजक यति सत्देवानन्द को नोटिस भेज किसी भी धर्म, समुदाय या जाति के विरुद्ध भड़काऊ भाषा का इस्तेमाल न करने के निर्देश दिए है।

पुलिस अधीक्षक अर्जित सेन ठाकुर ने बताया कि मुबारिकपुर में आयोजित की जा रही धर्म संसद के संदर्भ में पुलिस को निगरानी के निर्देश मिले हैं। ताकि इस आयोजन में किसी प्रकार की असामाजिक गतिविधि या भड़काऊ भाषण आदि न होने पाए। एसपी ऊना ने कहा कि अभी तक संबंधित आयोजन से पुलिस को किसी भी प्रकार की शिकायत नहीं मिली है। लेकिन फिर भी पुलिस इस पर निगाह रखे हुए हैं।

 

धर्म संसद में विशेष रूप से पहुंचे यति नरसिंहानंद सरस्वती ने कहा है कि वह हिंदू धर्म के वफादार कुत्ते का किरदार निभा रहे हैं। नरसिंहानंद ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में हिंदू धर्म लगातार पतन की ओर जा रहा है। विडंबना यह है कि हिंदुस्तान में ही हिंदुओं के खिलाफ लगातार अपराध बढ़ रहे हैं।

राजनीतिक दल तो इस पर चुप्पी साधे ही बैठे हैं इसके साथ-साथ अब धर्मगुरुओं ने भी इस पर आवाज उठाना बंद कर दिया है। उन्होंने कहा कि सदियों से हिंदू धर्म में यह संस्कृति रही है कि परिवार की सुरक्षा के लिए कुत्ते घरों या गलियों में पाले जाते थे। जबकि खतरा होने पर यही कुत्ते न केवल चीख चिल्लाकर अपने मालिक को सजग करते हैं अपितु उनकी रक्षा में भी अपना पूरा दायित्व निर्वाह करते थे।

नरसिंहानंद ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में हिंदू धर्म पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है और वह धर्म के वफादार कुत्ते का रोल निभाते हुए चीख चिल्लाकर हर खतरे से लोगों को आगाह मात्र कर रहे हैं। किंतु उनकी इसी जागरूकता अलग को विवादित बयानों का नाम देकर हिंदू धर्म की सुरक्षा को गौण किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि आज के समय में हिंदुओं की बहू बेटियां घरों में ही सुरक्षित नहीं है। नरसिंहानंद सरस्वती ने द कश्मीर फाइल का जिक्र करते हुए कहा कि आने वाले समय में हिमाचल के हिंदुओं के साथ कश्मीरी पंडितों जैसा व्यवहार न होने पाए इसी के चलते वह समाज को जागृत करने का काम कर रहे हैं।

दूसरी तरफ धर्म संसद के आयोजक यति सत्देवानंद सरस्वती का कहना है कि माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्देशानुसार पुलिस विभाग द्वारा धर्म संसद के आयोजन को लेकर नोटिस जारी किया गया है। जिसमें किसी प्रकार की भड़काऊ भाषण या ऐसी गतिविधि से परहेज करने की हिदायत जारी की गई है।

उन्होंने कहा कि धर्म संसद में शांतिपूर्वक तमाम विषयों पर चर्चा की जा रही है। वहीं पुलिस को भी नोटिस के संबंध में जवाब दिया जा चुका है। उन्होंने इस नोटिस को नियमित रुटीन का हिस्सा करार दिया। उन्होंने कहा कि धर्म संसद में केवल मात्र सनातन धर्म की गतिविधियों पर चर्चा और चिंतन किया जा रहा है। धर्म संसद में ना तो भीड़ इकट्ठा की गई है न ही कोई व्यक्ति यहां पर हथियार लेकर आया है। धर्म संसद में केवल सनातन धर्म की सत्यता के प्रचार को लेकर विचार मंथन किया जा रहा है।

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