एन ए आई, ब्यूरो।

शिमला, देश की महिला पुलिस कर्मचारियों को कार्यालयों या फील्ड में ही नहीं, परिवार और समाज में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। महिला अधिकारियों के राष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे व अंतिम दिन राजस्थान की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रीति चौधरी ने अपना दर्द बयान किया। उन्होंने बताया कि सब इंस्पेक्टर बनने के बाद उनसे कोई शादी नहीं करना चाहता था। शादी के लिए जो रिश्ते आते थे, उन्हें लगता था – पुलिस वाली है, ड्यूटी के लिए ज्यादातर घर से बाहर ही रहना पड़ेगा। रिश्ते के लिए उनके परिवार को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। इसके बाद राज्य सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद वह अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पद पर तैनात हुईं।

वहीं, दिल्ली पुलिस की सहायक उप निरीक्षक मीनाक्षी राठी की बेटी इशिता ने इस साल यूपीएससी में आठवां रैंक हासिल किया। उन्हें भी अपनी बेटी को शिक्षित करने के लिए ससुराल वालों के विरोध का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद पुलिस महिला अधिकारियों ने खुद को अपनी बेटियों को इतना मजबूत बनाया कि उन्होंने बर्मिंघम में देश को मेडल दिलाने के अलावा बैडमिंटन और अन्य खेलों में देश का नाम रोशन किया है। देश की पहली महिला अधिकारियों में शामिल मंजरी जहरुर ने कहा कि पहले महिला कर्मी को अपनी योग्यता साबित करनी पड़ती थी।

उन्हें हल्के में लिया जाता था। अब हालात बदल रहे हैं। आज पुलिस में महिलाएं तेजी से ऐसा कार्य कर रही हैं, जिन्हें अब तक केवल पुरुषों के लिए माना जाता था। पुलिस सेवा में होने के बावजूद महिलाओं को स्त्रीत्व और परिवार देखभाल के महत्व को बनाए रखना चाहिए। चंडीगढ़ पुलिस के निरीक्षक तकदीर सिंह मलिक ने अपनी बेटी मोनिका को एक अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी बनाया। वर्ष 2022 के कॉमनवेल्थ खोलों में कांस्य पदक जीता है। गुजरात पुलिस के सहायक उप निरीक्षक इरफान मीर की 17 वर्षीय बेटी तसनीन मलिक वर्तमान में दुनिया की नंबर वन जूनियर बैडमिंटन खिलाड़ी हैं। दिल्ली पुलिस की सहायक उप निरीक्षक अमृता सिंह वर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो की सिल्वर मेडलिस्ट तुलिका मान की मां हैं। माउंट एवरेस्ट समेत सात चोटियों को फतह करने वाली अपर्णा कुमार ने असफलताओं से नहीं डरने को प्रोत्साहित किया।

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