एन ए आई, ब्यूरो

उना, प्रदेश के स्वर्ण संगठनों द्वारा प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही में गठित किए गए सामान्य आयोग को एक्ट के तौर पर लागू करने की मांग को लेकर 16 मार्च को निर्धारित किए धरने से 2 दिन पहले धरना प्रदर्शन में शामिल होने वालों को नोटिस जारी कर दिए गए हैं। देवभूमि स्वर्ण संगठन के पदाधिकारियों में से एक को इसी तरह का नोटिस जिला पुलिस द्वारा भेजा गया है जिसमें 16 मार्च को धरना प्रदर्शन में शामिल न होने की हिदायतें जारी की गई है।

जिला पुलिस द्वारा शिमला में 16 मार्च को आयोजित होने वाले धरना प्रदर्शन से ठीक पूर्व देवभूमि स्वर्ण संगठन के पदाधिकारियों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। इस नोटिस में पदाधिकारियों को दो टूक शब्दों में धरना प्रदर्शन में शामिल न होने की हिदायत जारी की गई है। फिलहाल ऊना में देवभूमि स्वर्ण संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष विनय राणा को ही नोटिस मिला है। नोटिस हासिल करने वाले देवभूमि स्वर्ण संगठन के प्रदेश अध्यक्ष विनय राणा ने इसे सरकार का तानाशाही रवैया करार दिया है। उन्होंने कहा कि है लोकतांत्रिक देश है और लोकयह तांत्रिक व्यवस्था में किसी को भी अपना हक मांगने के लिए आवाज उठाने का मौलिक अधिकार प्राप्त है। लेकिन सरकार ने स्वर्ण समाज की आवाज को दबाने का प्रयास किया है। उन्होंने बताया कि उन्हें जारी किए गए नोटिस में यह कहा गया है कि आपके शिमला में धरना प्रदर्शन करने से अराजकता का माहौल पैदा हो सकता।

 

वी ओ 2 — वही देवभूमि स्वर्ण संगठन के जिला सचिव अमित शर्मा ने भी इस फरमान को तुगलकी फरमान करार दिया है। उन्होंने सरकार के इस फरमान की 90 के दशक में कश्मीरी पंडितों के साथ हुए व्यवहार से तुलना की है। उन्होंने कहा कि 90 के दशक में कश्मीरी हिंदुओं को गन प्वाइंट पर कश्मीर से बाहर धकेला गया था, ठीक उसी तरह यह सरकार प्रशासन से नोटिस जारी करते हुए स्वर्ण समाज को उसके अधिकारों से वंचित करने का प्रयास कर रही है। अमित शर्मा ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में इस तरह के नोटिस दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने चेतावनी दी है कि सरकार को अभी इस प्रकार के नोटिस का खामियाजा भुगतने के लिए भी तैयार रहना होगा। स्वर्ण समाज इसी साल हो रहे विधानसभा चुनाव में इस सरकार को सत्ता से बेदखल करते हुए इन तुगलकी फरमानों का जवाब देगा।

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