एन ए आई ब्यूरो।

ऊना, जिला में करीब 2 माह पूर्व शुरू हुए रबी फसलों के मौजूदा सीजन में पहली बार बारिश की बूंदे जनवरी माह के प्रथम सप्ताह में बरसी है। खेती कारोबार से जुड़े लोग इस बार इसका लंबे अरसे से बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। इस बारिश का महत्व जहां एक तरफ फसलों के लिए काफी है, सर्दी के इस मौसम में सर्दी जनित रोगों को रोकने में भी यह बारिश काफी कारगर साबित होगी। आसमान से बरसी राहत की बूंदे किसानों के चेहरे पर खुशहाली लेकर आई हैं। किसानों का कहना है कि लंबे अरसे से इस बारिश का इंतजार था। जिला के मैदानी इलाकों में हालांकि सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन अधिकतर कृषि योग्य भूमि बरसाती पानी पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि रबी फसलों के सीजन की यह पहली बारिश है। बारिश की कमी से दम तोड़ने की कगार पर पहुंची फसलों को इससे निश्चित रूप से संजीवनी मिलेगी।

वहीँ जिला के प्रमुख कृषि वैज्ञानिक डॉ वीएन सिन्हा मानते हैं कि मानसून सीजन के बाद करीब 4 माह के लंबे अंतराल के बाद ऐसी बारिश हो रही है। खेती कारोबार के लिए यह बारिश अमृत से कम नहीं है। रबी फसलों में परंपरागत गेहूं, चना और दलहनी फसलों के अतिरिक्त सब्जियों की पैदावार के लिए आसमान से बरस रहा यह पानी संजीवनी बनकर आया है। हालांकि आलू की फसल के लिए मौसम विभाग के अनुसार 3 से 4 दिन तक होने वाली बारिश नुकसानदायक साबित हो सकती है। इस फसल में झुलसा रोग आने की प्रबल संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं। और यदि आलू के पत्तों में काला धब्बा आने की शिकायत सामने आती है तो तुरंत कृषि वैज्ञानिकों से संपर्क करें। डॉक्टर वीएन सिन्हा ने बताया कि गेहूं की पैदावार लेने वाले किसानों के लिए खुशखबरी यह है कि इस बारिश के चलते पीला रतुआ नामक रोग की संभावना 90 फ़ीसदी तक कम हो जाती है।

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