प्रभावित परिवार को 10 लाख मुवावजे की उठाई मांग
वन और शहरी विकास मंत्री क्यों है चुप : छाजटा

हिमाचल प्रदेश कांग्रेस पार्टी शिमला ग्रामीण अध्यक्ष यशवंत छाजटा ने वन विभाग की कार्य प्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। प्रेस को जारी बयान में छाजटा ने कहा कि दीवाली की रात शहर के बीचोबीच तेंदुआ मासूम बच्चों को उठा कर ले गया। घटना को हुए एक हफ्ता बीत चुका है लेकिन विभाग ने इस पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं कि। ना तो तेंदुए को आदमखोर घोषित किया गया न ही प्रभावित परिवार को राहत के तौर पर मुआवजा दिया गया। उन्होंने कहा कि सरकार ने भी इस मसले पर चुप्पी साध कर रखी हुई है। उन्होंने पूछा कि वन मंत्री और को तो शायद इस घटना के बारे में जानकारी ही नहीं है। यदि उन्हें इस का पता होता तो वह अपने विभाग के अधिकारियों को निर्देश देते। शहरी विकास मंत्री जो शिमला के विधायक भी हैं ने इतनी बड़ी घटना पर चुप्पी साधी हुई है।
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि पूरा वन विभाग सोया हुआ है। यही हादसा यदि वीआईपी एरिया में पेश आता तो पूरी अफसरशाही वहाँ दिन रात डटी रहती। छाजटा ने मुख्यमंत्री से पूछा कि इस मसले में क्यों देरी की जा रही है। उन्होंने कहा कि पूरी अफसरशाही सोई हुई है उन्हें कोई पूछने वाला नहीं है।
उन्होंने मांग की है कि तेंदुए को जल्द आदमखोर घोषित किया जाए। शहर के जंगल से सटे इलाकों में फेंसिंग,कैमरों व स्ट्रीट लाइटों की उचित व्यवस्था की जाए। डाउनडेल व कनलोग हादसों के पीड़ित परिवारों को कम से कम दस-दस लाख रुपये की आर्थिक मदद दी जाए।
छाजटा ने शहर के बीचों-बीच इस तरह के हादसों पर हैरानी व्यक्त की है व इसे पूर्णतः प्रदेश सरकार,नगर निगम शिमला व वन विभाग की नाकामयाबी करार दिया है। उन्होंने कहा कि डाउन डेल शहर के बीचों-बीच है। जब इस तरह की घटना यहां पर हो सकती है तो फिर शिमला शहर के इर्दगिर्द के इलाकों में नागरिकों की जानमाल की सुरक्षा की तो कल्पना भी नहीं की जा सकती है। उन्होंने शहर में खराब पड़ी स्ट्रीट लाइटों को ठीक करवाने की मांग की है।

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