एन ए आई, ब्यूरो।

चिंतपूर्णी, उत्तर भारत के प्रसिद्ध शक्तिपीठ माता चिंतपूर्णी के मंदिर में शनिवार को चैत्र नवरात्र मेले का शुभारंभ वर्ष प्रतिपदा के अवसर पर धूमधाम से किया गया। चैत्र नवरात्र मेले के लिए माता के मंदिर को दुल्हन की तरह सजाया गया है। सुबह सवेरे माता की पूजा अर्चना और हवन यज्ञ के साथ चैत्र नवरात्र मेले का आरंभ हुआ। वही सुबह से ही माता के दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगना शुरू हो गई थी। हजारों श्रद्धालुओं ने माता की पावन पिंडी के दर्शन करते हुए मंदिर में शीश नवाया। मंदिर न्यास व जिला प्रशासन की तरफ से मेले को लेकर पुख्ता तैयारियां की गई हैं। वहीं श्रद्धालुओं की हर सुविधा का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है।

2 अप्रैल से 10 अप्रैल तक चलने वाले नवरात्र मेले में लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। इससे पूर्व शनिवार सुबह विधिवत पूजा अर्चना और हवन यज्ञ के साथ मां चिंतपूर्णी के मंदिर में नवरात्रों का आगाज हुआ। नवरात्र मेले के लिए माता के मंदिर को भव्य स्वरूप से सजाया गया है। चिंतपूर्णी की बारी दार सभा के अध्यक्ष रविंद्र कालिया ने माता के सभी श्रद्धालुओं को चैत्र नवरात्र की शुभकामनाएं देते हुए उज्जवल भविष्य की कामना की।

उन्होंने बताया कि 2 से 10 अप्रैल तक चलने वाले चैत्र नवरात्र मेले के दौरान 9 अप्रैल को माता की अष्टमी का भव्य समारोह आयोजित किया जाएगा। अष्टमी के दिन मंदिर परिसर में 3 विशेष पूजा आयोजित होंगी। उन्होंने बताया कि वह भीड़ की सभी पाबंदियों को इस बार मेले से हटा लिया गया है और करीब 2 वर्ष के बाद मिला अपने पुराने स्वरूप में लौटा है। उन्होंने कहा कि माता की श्रद्धालु बिना किसी हिचकिचाहट के मां की पवित्र पिंडी के दर्शन करने के लिए पहुंच सकते हैं।

 

दूसरी तरफ माता के मंदिर में पिंडी के दर्शन को पहुंचे दूरदराज के श्रद्धालुओं ने मेला आयोजित होने पर खुशी जाहिर की। श्रद्धालुओं ने कहा कि माता के मंदिर में होने वाले नवरात्र मेलों के दौरान वह निरंतर आते हैं। उन्होंने कहा कि कोविड-19 की परिस्थितियों के बीच माता के दर्शन भी दुर्लभ हो चुके थे। लेकिन करीब 2 साल के बाद मिला पुराने स्वरूप में लौटा है। इस मौके पर श्रद्धालुओं ने भी माता के मंदिर में शीश नवाकर पवित्र पिंडी के दर्शन करते हुए विश्व में शांति और सुख समृद्धि की कामना की।

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