एन ए आई,ब्यूरो।

ऊना, जिला ऊना के गोंदपुर जयचंद में उद्योग प्रबंधन और ग्रामीणों के बीच चल रहे विवाद में कांग्रेस भी कूद पड़ी है। नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री के पैतृक गांव में उद्योग प्रबंधन और ग्रामीणों में पराली जलाने को लेकर चल रहा विवाद लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। वहीं रविवार को ग्रामीणों द्वारा किए जा रहे धरना प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस के जिला अध्यक्ष राणा रणजीत सिंह भी अपने कार्यकर्ताओं के साथ ग्रामीणों का साथ देने के लिए मौके पर जा पहुंचे। ग्रामीणों का कहना है कि यह उद्योग करीब 15 वर्ष से यहां पर चल रहा है और इस से लेकर किसी को कभी भी कोई भी परेशानी नहीं रही है। लेकिन अब इस उद्योग में पराली जलाने का क्रम शुरू कर दिया गया है। अब इस विवाद में जिला कांग्रेस कमेटी भी ग्रामीणों के पक्ष में कूद पड़ी है।

 

वहीं रविवार को ग्रामीणों द्वारा किए जा रहे हैं धरना प्रदर्शन के दौरान माहौल इतना ज्यादा तनावपूर्ण हो चुका था कि पुलिस को बड़ी संख्या में जवानो के जिलाध्यक्ष राणा रणजीत सिंह भी अपने कार्यकर्ताओं के साथ मौके पर पहुंचे उन्होंने भी उद्योग प्रबंधन को जमकर आड़े हाथों लिया।

राणा रणजीत सिंह ने कहा कि यह उद्योग यहां 15 वर्ष से चल रहा है लेकिन आज तक कभी इस उद्योग के खिलाफ किसी ने भी कोई आवाज नहीं उठाई। अब यह उद्योग पराली जला कर लोगों के लिए मुसीबतें खड़ी करने लग गया है यही कारण है कि अब हिमाचल ही नहीं बल्कि पंजाब के लोगों को भी सड़क पर उतरकर इसका विरोध करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि उद्योग प्रबंधन द्वारा खेतों में खड़ी फसलें ही खरीद ली गई हैं।

उद्योग प्रबंधन की इस रणनीति के चलते जहां एक तरफ लोगों का दम घुटने लगा है वहीं दूसरी तरफ पशुपालकों के लिए अपने पशुओं के लिए चारा जुटाना भी मुश्किल हो चुका है। जिसका सीधा सा कारण यह है कि उद्योग प्रबंधन पहले ही पशु चारे के रूप में प्रयोग किए जाने वाले भूसे को भारी मात्रा में खरीद रहा है। उन्होंने कहा कि पंजाब और हरियाणा में जलाई जाने वाली पराली से दिल्ली के लोगों को यदि दिक्कत हो सकती है तो गोंदपुर में जल रही पराली से यहां के और पंजाब के लोगों को दिक्कत क्यों नहीं हो सकती।

उन्होंने कहा कि मुख्यतः दो मांगों को लेकर लोग धरना प्रदर्शन कर रहे हैं जिनमें से एक यहां पराली जलाने का विरोध किया जा रहा है, जबकि दूसरी मांग के तहत लोग इस उद्योग प्रबंधन द्वारा गंदम की फसलें खरीदे जाने का विरोध कर रहे हैं, जिसके कारण पशु चारे के दाम करीब 1400 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर पहुंच चुके हैं।

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