एन ए आई, ब्यूरो।

शिमला, हिमाचल प्रदेश के राज्य विकलांगता आयुक्त ने दृष्टिबाधित विद्यार्थियों की परीक्षा के मामले में शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव को कुल्लू के राजकीय महाविद्यालय के प्रिंसिपल रौशन लाल के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। उनसे 15 दिन के भीतर जांच रिपोर्ट मांगी गई है। यह कार्रवाई उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष और राज्य विकलांगता सलाहकार बोर्ड के विशेषज्ञ सदस्य प्रो. अजय श्रीवास्तव की शिकायत पर हुई है।

गौरतलब है कि प्रो. अजय श्रीवास्तव ने राज्य विकलांगता आयुक्त संजय गुप्ता को भेजी शिकायत में कहा गया था कि कुल्लू कॉलेज के प्रिंसिपल राज्य सरकार द्वारा 12 अप्रैल 2021 को जारी की गई दृष्टिबाधित विद्यार्थियों की परीक्षा संबंधी गाइडलाइंस को लागू नहीं कर रहे हैं। यह केंद्र सरकार, हाईकोर्ट एवं राज्य सरकार के आदेशों का खुला उल्लंघन और दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के साथ भेदभाव का मामला है। उन्होंने मामले की जांच कर प्रिंसिपल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की थी।

शिकायत में कहा गया था कि राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप प्रिंसिपल ने दृष्टिबाधित एवं विकलांगता के कारण परीक्षा में लिखने में असमर्थ विद्यार्थियों के लिए राइटर का कोई पैनल तैयार नहीं किया है। जबकि 12 अप्रैल 2021 की राज्य सरकार की गाइडलाइंस में स्पष्ट लिखा है कि हाईकोर्ट के फैसले के मुताबिक जब तक पैनल तैयार न हो जाए तब तक पुरानी गाइडलाइंस ही लागू की जाएंगी।

पुरानी गाइडलाइंस में विद्यार्थी किसी भी शैक्षणिक योग्यता वाले व्यक्ति को परीक्षा में लिखने के लिए राइटर बना सकते हैं। प्रिंसिपल कुल्लू कॉलेज के बीए फाइनल के दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को राइटर नहीं उपलब्ध करा रहे थे। वह विद्यार्थियों को एक क्लास जूनियर राइटर ढूंढ कर लाने का दबाव बना रहे थे। यही नहीं, प्रिंसिपल का यह भी कहना था कि सभी प्रश्नपत्रों में परीक्षार्थी एक ही राइटर का इस्तेमाल करें। उसे राइटर बदलने की छूट नहीं दी जा रही थी। जबकि यह कानूनन गलत है। विद्यार्थियों ने इसकी शिकायत अजय श्रीवास्तव की से की थी।

अजय श्रीवास्तव ने राज्य विकलांगता आयुक्त से यह मांग भी की थी कि प्रदेश के सभी शिक्षण संस्थानों को इस बारे में कानून का पालन करने के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए जाएं।

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