एन ए आई ब्यूरो।

ऊना, एचपी-शिवा परियोजना कुटलैहड़ के किसानों के लिए आय का एक बेहतर साधन बनने जा रही है। किसानों की बंजर भूमि पर बागवानी विभाग एचपी-शिवा परियोजना के तहत फलदार पौधे लगाने का कार्य कर रहा है। जिससे आने वाले समय में किसानों को आय का स्रोत मिलेगा और उनकी आय में वृद्धि होगी। अब तक कुटलैहड़ विस क्षेत्र में 20 करोड़ की लागत से 10 हैक्टेयर भूमि पर सघन खेती तकनीक आधारित फलदार पौधों का रोपण किया गया है, जिसके अंतर्गत किसानों के 9 कलस्टर बनाए गए हैं। पौधे रोपने का सारा कार्य उद्यान विभाग की तकनीकी टीम की देखरेख में हुआ है। शिवा योजना के लाभार्थी बौल निवासी रूप चंद बताते हैं कि उन्होंने लगभग 7 कनाल भूमि बागवानी विभाग को एचपी शिवा प्रोजैक्ट के तहत फलदार पौधे लगाने के लिए दी है। बाड़बंदी तथा सिंचाई के लिए पाइप लाइन का कार्य विभाग ने ही किया। समय-समय पर बागवानी विभाग के विशेषज्ञ फलदार पौधों का निरीक्षण करने के लिए आते हैं और दवाइयां भी उपलब्ध करवाते हैं।

वहीं हरमीत सिंह ने बताया कि एचपी शिवा परियोजना के तहत उनकी 20 कनाल भूमि पर 800 पौधे मौसमी व माल्टा किस्म के फलदार पौधे रोपित किए गए हैं। माल्टा प्रजाति के फलदार पौधे लगभग अढ़ाई साल में फल देना शुरू कर देंगे। उन्होंने बताया कि जानवरों से पौधों को सुरक्षित रखने के लिए सोलर बाड़-बंदी भी विभाग ने ही की है।

शिवा योजना के अन्य लाभार्थी बौल निवासी सुरेंद्र सिंह बताते हैं कि उन्होंने एचपी शिवा प्रोजैक्ट के तहत लगभग 5 कनाल भूमि पर मौसमी के 350 फलदार पौधे रोपित किए है। फलदार पौधों की खेती किसानों को अपनी आजीविका अर्जित करने में काफी लाभदायक सिद्ध होगी।

एचपी-शिवा परियोजना के तहत 19 जुलाई 2021 में कुटलैहड़ विस क्षेत्र के हंडोला में पौधारोपण का कार्य आरंभ किया गया था और अगले वर्ष तक किसानों के पौधे फल देने लगेंगे, जिससे उन्हें आय प्राप्त होगी। बागवानी विभाग की ओर से रवि कुमार को किसानों की मदद करने के लिए टैक्निकल फैसिलिटेटर नियुक्त किया गया है। एचपी शिवा परियोजना का उद्देश्य फलदार पौधों की आधुनिक तथा वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देना है, ताकि किसानों की आर्थिकी को सुदृढ़ किया जा सके।

बागवानी विभाग के उद्यान प्रसार अधिकारी पवन कुमार ने कहा कि एचपी शिव परियोजना के अंतर्गत बौल में दो अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन के तहत 1.5 हैक्टेयर भूमि पर लगभग 1680 स्वीट माल्टा किस्म के फलदार पौधे लगाए गए हैं। इस कलस्टर में बौल गांव के 11 किसान लाभान्वित हुए हैं। उन्होंने कहा कि किसानों की भूमि को सुरक्षित खेती करने के लिए सोलर फैंसिंग तथा सिंचाई के लिए ड्रिप सिंचाई की सुविधा भी उपलब्ध करवाई गई है। पवन कुमार ने कहा कि किसानों को फैंसिंग से लेकर पौधे लगाने को गड्ढे करने, खाद, पौधे उपलब्ध करवाने तथा ड्रिप सिंचाई सुविधा प्रदान करने के लिए 80 प्रतिशत अनुदान सरकार की ओर से प्रदान किया जाता है, जबकि 20 प्रतिशत ही किसान को वहन करना होता है।

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