एन ए आई, ब्यूरो।

शिमला, भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा की कांग्रेस ने केवल वादे किए पर भाजपा ने वादे ही नहीं किए उनको पूरा भी किया।

कांग्रेस चुनाव के आखरी माह में वादे करती है जिससे जनता को गुमराह किया जा सके,पर जनता सब जानती है।

कांग्रेस पार्टी अब आम आदमी पार्टी से मुकाबला कर रही है तभी वो गारंटियां दे रही है , कांग्रेस का मुकाबला भाजपा के साथ है ही नही। भारद्वाज ने कहा की टीचर्स डे की पूर्व संध्या पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। गुरुजन सभी के जीवन की प्रेरणा होते हैं जो जीवन में सत्य और अनुशासन का पाठ पढ़ाते हैं। एक व्यक्ति के जीवन में गुरुजनों का अहम किरदार होता है।

जिस दिन से प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी है, शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व काम हुआ है। हर साल शिक्षा बजट को बढ़ाया गया। नए स्कूल खोलने की बात हो या फिर नए कॉलेज बनाने की जहां जिस चीज की जरूरत थी वहां उस संस्थान को खोला गया। शिक्षा हमारी प्राथमिकता सूची में सर्वोपरि है। हमारी सरकार ने इस बार शिक्षा क्षेत्र के लिए 8 हजार 412 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा आधुनिक समय की मांग है और हमारी सरकार गुणात्मक शिक्षा मुहैया करवाने के लिए प्रतिबद्ध है। और मुझे इस बात की खुशी है कि प्रदेश के स्कूलों और कॉलेजों में मिल रही गुणात्मक शिक्षा से प्रदेश के बच्चों का भविष्य संवर रहा है।

भारद्वाज ने कहा की कांग्रेस ने की सिर्फ घोषणाएं की पर पूरा तो भाजपा ने की। कांग्रेस के लोग कहते हैं कि जी हमने यहां स्कूल खोल दिए, वहां कॉलेज खोल दिए, लेकिन उन्होंने केवल खोलने की घोषणाओं के सिवा कुछ नहीं किया। 2017 में जब पूर्व की वीरभद्र सरकार का आखिरी साल था इन्होंने जाते-जाते घोषणाओं की झड़ी लगा दी।
जनता को ठगने के लिए इन्होंनें चुनाव से ठीक पहले 21 कॉलेज अनाउंस किए और उन कॉलेजों को खोलने के लिए एक-एक लाख का बजट भी रखा। जरा सोचिए एक लाख रुपये में कहीं कोई कॉलेज बना होगा, लेकिन कांग्रेस की दाद देनी होगी जिन्होंने चुनाव से पहले 21 कॉलेज खोलने के लिए 21 लाख रुपये का प्रावधान किया। जब प्रदेश में हमारी सरकार आई तो लोगों के साथ धोखा न हो इसके लिए 21 में से 17 कॉलेज के लिए मुनासिब बजट का प्रावधान किया और आज वो कॉलेज धरातल पर दिख रहे हैं। लेकिन कांग्रेस की सोच देखिए, किस तरह से लोगों को ठगने और हमारे प्रदेश के युवाओं के साथ छल करने का प्रयास इन्होंने किया। और आज जब ये सत्ता में नहीं हैं तो ऐसे दूध के धुले बनते हैं कि इनसे ईमानदार और शरीफ कोई नहीं।

भारद्वाज ने कहा की शिक्षा तक पहुंच के मामले में हिमाचल का चौथा रैंक।
हमारी सरकार में प्रदेश में विश्वविद्यालयों की संख्या 27 है, जोकि कांग्रेस के समय 25 थी। कॉलेजों की बात करें तो कांग्रेस के समय प्रदेश में 327 कॉलेज थे, हमारी सरकार में कॉलेजों की संख्या 344 हो चुकी है। कांग्रेस के समय उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए दाखिले लेने वाले युवाओं की संख्या करीब ढाई लाख थी। हमारी सरकार में दाखिले लेने वाले युवाओं की संख्या करीब तीन लाख है। यह भारतीय जनता पार्टी की सरकार के प्रयासों का ही नतीजा है कि उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए युवाओं की शिक्षा तक पहुंच के मामले में हिमाचल देशभर में टॉप राज्यों में शुमार है। हिमाचल की इस इंडेक्स में चैथी रैंकिंग है।

भाजपा ने की दूसरी स्टेट यूनिवर्सिटी की शुरुआत
हिमाचल के गठन के बाद से प्रदेश में केवल एक ही विश्वविद्यालय की स्थापना हुई, जो शिमला में है। 22 जुलाई 1970 को हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला की स्थापना की गई थी। हमारी सरकार ने मंडी में हिमाचल प्रदेश के दूसरे विश्वविद्यालय यानी सरदार पटेल विश्वविद्यालय की शुरुआत की है। हिमाचल की भौगोलिक परिस्थितियां ऐसी हैं कि पूरे प्रदेश से छात्र पढ़ाई के लिए शिमला नहीं पहुंच सकते। ऐसे में कई छात्र उच्च शिक्षा ग्रहण नहीं कर पाते। मंडी में नया विश्वविद्यालय बनने से प्रदेश के दूरदराज से आने वाले छात्रों को फायदा होगा। कॉलेज-यूनिवर्सिटी टीचर्स को UGC पे-स्केल। प्रदेश के कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में कार्यरत करीब 3 हज़ार 200 लेक्चरर और प्रोफेसरों को यूजीसी का 7वां पे-स्केल के लाभ देने का निर्णय भी हमारी सरकार ने लिया है। 1 जनवरी 2016 से 31 मार्च 2022 तक संशोधित यूजीसी स्केल देने पर सरकारी खजाने पर अनुमानित 337 करोड़ का वित्तीय भार पड़ेगा। इसके साथ ही सरकार ने एरियर देना भी तय किया है। वर्ष 2021-22 के लिए इस मद में वार्षिक 113 करोड़ रुपये का अनुमानित व्यय होगा और चालू वित्तीय वर्ष की शेष अवधि के लिए यह 75 करोड़ रुपये होगा। हमारी सरकार ने करीब 20 हजार छात्रों को बांटे लैपटॉप। हमारी सरकार ने इसी महीने श्रीनिवास रामानुजन छात्र डिजिटल योजना के तहत प्रदेश के 19 हज़ार 847 मेधावी छात्रों को आधुनिक तकनीक वाले लैपटॉप बांटे हैं। मेधावियों को लैपटॉप वितरण का आगाज यहीं मंडी से किया था। कोरोना संकट के कारण पिछले दो साल से मेधावियों को लैपटॉप नहीं बांटे जा सके थे। अब, जब हालात सामान्य हो हुए तो एकसाथ करीब 20 हजार मेधावियों को लैपटॉप दिए गए। इनमें महाविद्यालयों के तीनों संकायों विज्ञान, वाणिज्य और कला के 1 हजार 885 मेधावी भी शामिल थे। मेधावियों को जो लैटपटॉप दिए गए हैं उसपर सरकार ने करीब 83 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।
दशकों बाद छात्रवृति राशि में की गई अभूतपूर्व वृद्धि
इस बार के बजट में हमने कक्षा 3 के छात्रों से लेकर रिसर्च स्कॉलर तक को उचित छात्रवृत्ति देने का प्रयास किया है। इन बढ़ोतरी का लाभ खासकर ग्रामीण इलाकों के मेधावी बच्चों को मिलेगा।हमारी सरकार ने स्कूली बच्चों को मिलने वाली छात्रवृत्ति राशि में दशकों बाद वृद्धि की है। शोधार्थियों को मिलेगी 3 हज़ार रुपये की मासिक स्क़ॉलरशिप।

उन्होंने कहा के हमने मुख्यमंत्री शोध प्रोत्साहन योजना शुरू करने का फैसला लिया है। इस योजना के तहत यूनिवर्सिटी में रिसर्च कर रहे ऐसे शोधार्थी जिन्हें किसी भी तरह की फैलोशिप नहीं मिल रही उन्हें 3 हज़ार रुपये प्रतिमाह फैलोशिप दी जाएगी। देश की रक्षा में शहीद या विकलांग हो जाने वाले Armed Forces के जवानों के बच्चों को छात्रवृति दी जाती है। यह छात्रवृति मात्र 30 रुपये से 200 रुपये प्रतिमाह थी। यही नहीं, इस छात्रवृति में 1983 के बाद से वृद्धि ही नहीं की गई। अब हमारी सरकार ने ऐसे बच्चों को पढ़ाई के लिए सालाना 18 हज़ार रुपये देने का प्रावधान बजट में किया है। इसमें छात्रों को प्रतिमाह 1500 रुपये छात्रवृति मिलेगी।

आर्थिक रूप से कमजोर मेधावी विद्यार्थियों को मेधा प्रोत्साहन योजना के तहत 12वीं और ग्रेजुएशन के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए वित्तिय सहायता प्रदान की जा रही है। इसके अलावा स्वर्ण जयंती सुपर 100-योजना, प्रदेश के स्कूलों को स्मार्ट बनाने के लिए आईसीटी विद्यालय योजना, प्रदेश के कॉलेजों और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में वर्चुअल क्लासरूम स्थापित किए जा रहे हैं। अटल स्कूल वर्दी योजना के अंतर्गत पहली से 12वीं क्लास तक के 8 लाख से अधिक विद्यार्थियों को स्कूल वर्दी के दो-दो सैट दिए जा रहे हैं। सभी सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को निशुल्क किताबें दी जा रही हैं।

हिमाचल प्रदेश पहाड़ी राज्य है और इसकी भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए हमने प्रदेश में कई स्कूलों को अपग्रेड किया है, ताकि बच्चों को स्कूली शिक्षा उनके घर के ही नजदीक मिल सके। हमारी सरकार ने 72 से अधिक मिडिल स्कूलों हाई स्कूल में अपग्रेड किया। और 70 से अधिक स्कूलों को हाई स्कूल से सीनियर सेकेंडरी स्कूल में अपग्रेड किया है।

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