एन ए आई ब्यूरो।

ऊना,  ऊना जिला मुख्यालय के साथ एक गांव में एक ऐसा पुल भी है, जिसके बनने के बाद भी ग्रामीणों को लाभ नहीं मिल पाया है। करीब 8 लाख रुपये खर्च पंचायत द्वारा बनाया गया पुल छ: वर्ष बाद भी मात्र सफेद हाथी साबित हो रहा है। बात है मुख्यालय के साथ लगते गांव मदनपुर के वार्ड नंबर एक की। जहां पर पंचायत द्वारा वर्ष 2016 में करीब 20 मीटर लंबा पुल बना दिया, लेकिन आज तक इसका लाभ स्थानीय लोगों को नहीं मिल पाया है। ऐसे में ग्रामीणों ने अब पंचायत प्रधान व जिलाधीश ऊना से समस्या हल की गुहार लगाई है। बता दें कि ग्राम पंचायत मदनपुर के वार्ड नंबर एक में जाने के लिए मार्ग न होने के कारण ग्रमीणों ने 2012 में विधायक वीरेंद्र कंवर के समक्ष पुल बनाने की मांग उठाई थी। खड्ड से आने-जाने के कारण ग्रामीणों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। ऐसे में गांव के करीब 95 लोगों ने हस्ताक्षर कर खड्ड के ऊपर पुल बनाने की बात कहते हुए पंचायत को रास्ता देने की बात कही। जिसके बाद पंचायत ने वर्ष 2016 में खड्ड के ऊपर करीब आठ लाख रुपये की लागत से पुल का निर्माण कर दिया और विधायक वीरेंद्र कंवर व सांसद अनुराग ठाकुर ने इस पुली का उद्घाटन भी किया। पुल के उद्घाटन होने के बाद ही स्थानीय भूमि मालिकों ने गेट लगाते हुए रास्ते को बंद कर दिया। तब से लेकर आज तक ग्रामीणों को आने-जाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। हालत यह है कि किसी बीमार को मेन सड़क तक पहुंचाने के लिए चरपाई पर लाद कर ले जाना पड़ता है। वहीं गांव में अगर किसी घर में शादी या अन्य समाजिक कार्यक्रम हो, तो भी काफी दिक्कत पेश आती है। ग्रामीणों ने इस समस्या के लिए प्रधान व डीसी ऊना के पास समस्या हल की गुहार लगाई, लेकिन आज दिन तक समस्या का हल नहीं हो पाया है।

वहीँ ग्राम पंचायत मदनपुर के प्रधान गुरचरण सिंह भी मानते है कि इस पुल का स्थानीय लोगों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है, उन्होंने कहा कि वर्ष 2012 में 95 ग्रामीणों ने हस्ताक्षर कर पुली निर्माण के लिए पत्र लिखा था और वर्ष 2016 में करीब 8 लाख रुपये खर्च कर पुल तैयार किया गया, लेकिन गांव के एक परिवार द्वारा रास्ते के आगे गेट लगा दिया गया। दोनो पक्षों को बैठाकर मामले सुलझाने का प्रयास भी किया, लेकिन कोई हल नहीं निकल पाया है।

वहीं बीडीओ ऊना रमनवीर चौहान का कहना है कि यह मामला उनके ध्यान में आया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में प्रधान को उचित दिशा-निर्देश दिए गए हैं, ताकि ग्रामीणों को सहुलियत मिल सके।

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