एन ए आई, ब्यूरो।

शिमला, हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन शनिवार को सदन के भीतर और बाहर ओल्ड पेंशन स्कीम (ओपीएस) पर खूब हल्ला बोला गया। विपक्ष ने विधानसभा अध्यक्ष विपिन सिंह परमार को स्थगन प्रस्ताव देकर प्रश्नकाल शुरू होने से पहले सारा काम रोककर इस पर चर्चा मांगी। परमार ने कांग्रेस विधायकों के दिए स्थगन प्रस्ताव को अस्वीकार किया तो इससे उखड़ा विपक्ष नारेबाजी करने लगा। नारेबाजी के बीच प्रश्नकाल शुरू हुआ, तो विपक्ष ने सदन से वाकआउट कर दिया।

इससे पहले सदन में सत्ता पक्ष के विधायक भी न्यू पेंशन स्कीम लागू करने के लिए पूर्व कांग्रेस सरकार को जिम्मेवार ठहराते हुए कांग्रेस विधायकों के खिलाफ पलटकर नारेबाजी करने लगे। हंगामा बढ़ता गया और विपक्ष के सदस्य वेल में चले गए। हालांकि माकपा विधायक राकेश सिंघा अपनी सीट पर ही बैठे रहे।

उधर, पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर विधानसभा का घेराव करने राज्यभर से आए हजारों कर्मचारियों ने सदन से बाहर नारेबाजी शुरू कर दी। जब मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने उन्हें बातचीत के लिए बुलाया तो चौड़ा मैदान में कर्मचारियों ने ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों पर नाटी डाली।

शनिवार को कांग्रेस विधायक आशा कुमारी ने प्रश्नकाल शुरू होने से पहले कहा कि विधानसभा अध्यक्ष को स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया गया है। इस पर चर्चा शुरू करवाई जाए। प्रस्ताव पर चर्चा न करने पर विपक्षी कांग्रेस के सदस्य जब वेल में पहुंचकर नारेबाजी करते रहे तो विधानसभा अध्यक्ष ने उनसे अनुरोध किया कि वे अपनी सीट पर बैठें।

इस विषय पर पहले चर्चा हो चुकी है। प्रतिपक्ष इस मुद्दे को प्रश्नकाल के बाद व्यवस्था के प्रश्न के तहत उठा सकता है। वह स्थगन प्रस्ताव को अस्वीकार करते हैं। इस पर भी कांग्रेस विधायक हंगामा करते रहे। नारेबाजी के बीच 11:20 बजे प्रश्नकाल शुरू हो पाया। इसके बाद विपक्ष ने 11:24 बजे नारेबाजी करते हुए सदन से वाकआउट कर दिया।

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव पर जिस तरह की फजीहत हुई है, हमने कभी नहीं देखी। हर बात पर काम रोकने की बात करते हैं। कभी तो काम करो। जो बाहर गए हैं, जनता उन्हें बाहर ही रखेगी।

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